काशी में प्रारम्भ हुआ परम धर्म संसद, पहले दिन मंदिर रक्षा सहित तीन विधेयक पारित

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वाराणसी: । धर्मासंदो के हर हर महादेव के गगनचुम्बी उद्घोष के बीच प्रवर धर्माधाीश स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती जी महाराज आसन पर विराजमान होते है और संसद की प्रक्रिया सुचारू रूप से संचालित होने लगती है। यह दृश्य सजीव था रविवार को सीर गोवर्धनपुर में आयोजित परम धर्म संसद 1008 में, जहाॅ देश भर के 543 लोकसभा से सनातनधर्मी धर्मासंद, चारो धाम के प्रतिनिधि, 51 शक्तिपीठों सहित देश विदेश के कोने कोने से आये धर्मासंदों द्वारा तीन दिनों तक विभिन्न धार्मिक विषयों पर गहन मंथन प्रारम्भ हो गया। प्रवर धर्माधाीश स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती जी महाराज के आसन पर विराजित होते ही परम धर्म संसद का प्रथम सत्र प्रारम्भ हो जाता है जिसमें देश भर में विकास के नाम पर तोड़े जा रहे मन्दिरों के विध्वंस के खिलाफ चर्चा प्रारम्भ हुई, द्वितीय सत्र में गंगा रक्षा पर धर्मासंदो द्वारा चर्चा की गई।

सर्वप्रथम स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती जी महाराज ने परम धर्मसंसद के औचित्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि समाज में विशिष्ट व्यक्तियों का आचरण अत्यन्त प्रभावी होता है और समाज भी उसी मार्ग का अनुसरण करते हुए चलने लगता है। इस परम धर्म संसद में उपस्थित 1008 धर्म प्रतिनिधि 100 करोड़ सनानतधर्मियों के प्रतिनिधि है, जो यहाॅ से समाज के लिए सार्थक संदेश प्रेषित करेंगे। उन्होंने कहा कि समाज को जब भी मार्गदर्शन की आवश्यकता होती है तो वह विशिष्ट और ज्ञानी व्यक्तियों की तरफ ही रूख करता है, ऐसे में उन्हें निराशा हाथ नही लगनी चाहिए। परम धर्म संसद सबकी धार्मिक चिन्ताओं के सामाधान निकालने के लिए ही आयोजित की गई है। इसके बाद धर्मासंदो ने विभिन्न धार्मिक विषयों पर खुलकर विचार विमर्श किया। प्रथम सत्र में विकास के नाम पर मन्दिरों के विध्वंस के खिलाफ मन्दिर रक्षा विधेयक प्रस्तुत किया गया, जिसे धर्मासंदो द्वारा ध्वनिमत से पारित भी कर दिया गया। दूसरे सत्र में गंगा रक्षार्थ विधेयक जिसमें गंगा पर बने बांधों को तोड़ने का प्रस्ताव तथा गौ रक्षार्थ विधेयक प्रस्तुत किया जिसे भी धर्मासंदो द्वारा ध्वनिमत से पारित कर दिया गया।
इससे पूर्व परम धर्म संसद में जल पुरूष डाॅ. राजेन्द्र सिंह ने कहा कि विकास समाज के लिए आवश्यक तत्व है, लेकिन किसी कि भी धार्मिक आस्था को ठेस पहुॅचा कर विकास की बात करना बेमानी है। काशी का सुनियोजित तरीके से विकास ना करके अपितु विकास के नाम पर देवालयों को ही ध्वस्त करना प्रारम्भ कर दिया गया है जो सर्वथा अनुचित है। उन्होंने यह भी कहा कि गंगा की अविरलता की लड़ाई लड़ रहे स्वामी ज्ञान स्वरूप सानन्द का अन्तिम दर्शन भी सरकार ने साजिशन नही करने दिया जो अत्यन्त क्षोभ का विषय है। प्रख्यात धर्माचार्य अजय गौतम ने कहा कि सिर्फ काशी ही नही बल्कि देश के विभिन्न स्थानों पर भी सनातनी परम्परा के लोगो की आस्था पर निरन्तर प्रहार किया जा रहा है जिससे जनता बेहद आहत है। गुजरात से आये धर्मासंद किशोर दबे ने कहा कि विकास के नाम पर गुजरात में 218 मन्दिरों को तोड़ दिया गया लेकिन दूसरे धर्माे के स्थल को संरक्षित कर दिया गया, यह देश की सनानतधर्मी जनता के साथ अन्याय है। राम देवानन्द सरस्वती जी महाराज ने कहा कि यह हिन्दुओं की रक्षा के नाम पर सत्ता में आई यह सरकार छद्म हिन्दूवादी सरकार है जो एक तरफ अयोध्या में मंदिर के नाम पर लोगो को बेवकूफ बना रही है तो दूसरी तरफ काशी में ही प्राचीन मंदिरों को तोड़ने पर लगी हुई है। केरल से आये स्वामी भूवनात्मानन्द जी ने कहा कि गंगा हमारी संस्कृति का प्रतीक है, उसके संरक्षण में ही हमारा हित है, गंगा के लिए सबको एक होना होगा।
इससे पूर्व परम धर्म संसद का शुभारंभ चारो वेदों के स्वस्तीवाचन के साथ हुआ। स्वामी अविमुक्तेश्वरानन्द सरस्वती ने साक्षी दीप के सम्मुख समक्ष समस्त धर्मासंदो को शपथ दिलाई तत्पश्चात सदन की कार्यवाही प्रारम्भ हुई। परम धर्म संसद में प्रथम दिन ब्रम्हचारी सुबुद्धानन्द महाराज, महामण्डलेश्वर हरि चैतन्यानन्द, महामण्डलेश्वर ऋषिश्वरानन्द, ब्रम्हचारी ब्रम्हस्वरूपनन्द, स्वामी नारायणनन्द महाराज, जलकुमार साई मसंद, स्वामी इंदूभवानन्द महाराज, महन्त सुभाष दास जी महाराज, स्वामी राम देवानन्द सरस्वती, स्वामी प्रज्ञानन्द, स्वामी राम लोचन, स्वामी वेदानन्द, महन्त अशोक दास सहित परमेश्वर दत्त मिश्र, आर.एस. दूबे, पूर्व विधायक एवं मंत्री अजय राय, सुरेन्द्र पटेल, रामधीरज, संजीव सिंह, स्वामी महाराजमणि शरण सनातन जी, राजेन्द्र तिवारी, दीपक आत्रेय, विजयानन्द सरस्वती आदि धर्मानुरागियों ने धर्म संसद में विचार रखे।
विभिन्न धर्माे के प्रतिनिधि भी रहे उपस्थित – परम धर्म संसद में भारत के विभिन्न प्रान्तों से बड़ी संख्या में प्रतिनिधि भाग ले रहे है। जिनमें सर्वाधिक गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश से है। इसके अलावा पश्चिम बंगाल, तमिलनाडू, केरल, कर्नाटक, आन्ध्र प्रदेश और बिहार सहित सभी राज्यो के सनातनधर्मी भाग ले रहे है। वहीं ब्राजील से चाल्र्स और स्पेन के अविनाश भी परम धर्म संसद में भाग ले रहे है। मुस्लिमों की तरफ से सेराज सिद्दीकी प्रतिनिधित्व कर रहे है।
पाॅचवें दिन भी महायज्ञ में पड़ती रही आहूतियाॅ – परम धर्म संसद के प्रांगण में ही चल रहे विश्वकल्याणार्थ पंचदेवपासना यज्ञ रविवार को भी चलता रहा। पाॅच देव गणेश, शिव, रूद्र, दूर्गा एवं सूर्य की उपासना के लिए आचार्य विश्वेश्वर दातार धनंजय के आचार्यत्व में 25 भूदेवों द्वारा आहूतियाॅ दी गयी

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