ब्रिटिश कालीन तहसिल को लगा ग्रहण – अधिकारीयो के बंगले बने विरान

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शहर के शासकीय अधिकारीयो के बंगलो की हालत खराब 

 रात में भूत बंगले की तरह दिखाई पडते है शासकीय निवासस्थान.

चांदूर रेलवे – (शहेजाद खान) 
चांदूर रेलवे शहर में उपविभागीय अधिकारी,तहसिलदार,निवासी नायब तहसीलदार,मंडल अधिकारी,पटवारी, पंचायत समिती के बिडीओ,नगर परिषद मुख्याधिकारी,वन अधिकारी,पोलिस अधीक्षक,न्यायदंडाधिकारी,ग्रामीण रुग्णालय के वैद्यकीय अधिकारी,कर्मचारी, उपअभियंता बांधकाम विभाग,तहसिल, पाटबंधारे विभाग के साथ शहर में सभी शासकीय कार्यालय मुख्य रास्ते पर है. साथ ही साथ सभी शासकीय अधिकारीयो के निवास स्थान भी इस मुख्य रास्ते पर स्थित है. पर इन में से कुछ शासकीय अधिकारीयो के निवासस्थान की हालत पिछले कई महीनो से बद से बदसुरत दिखाई दे रही है. उपविभागीय अधिकारी, तहसिल के कोई भी अधिकारी अपने शासकीय निवास स्थान पर नही रहते है, इस कारण से आज इन बंगलो की हालत दिन ब दिन खराब होते नजर आ रही है. मेन रास्ते से लगे उपविभागीय अधिकारी, तहसिलदार निवास्थान के सामने की खाली जगह पर बडे बडे सागवान के झाड तथा निचे चारो और सुखे सागवान के पत्ते पडे रहते है. रात के समय लाईन बंद रहने के कारण ये शासकीय निवासस्थान एक विरान भूत बंगलो के भाती नजर आते है.
सभी सुख सुविधा से लेस थे शासकीय निवासस्थान
1967 में सर्व प्रथम चांदूर रेलवे सार्वजनिक बांधकाम विभाग ने एसडीओ निवासस्थान तयार किया. तो 1970 में  प्रेमकुमार आय.ए.एस. एसडीओ ने चांदूर रेलवे उपविभाग अधिकारी का पदभार संभाल कर काम की शुरुवात की थी. तब यहां कार्यरत एसडीओ इस शासकीय निवास्थान में रहते थे, तब का एक समय था जब इन बंगलो में अधिकारी निवास करते थे. राह चलते लोग भी बडे आदर के साथ यहां से गुजरते थे. इन निवासस्थान के आस पास का परीसर भी स्वच्छ सुंदर एवम् रास्ते से आना जाने वालो को अपने और आकर्षित करता था क्यों की इन सरकारी बंगले की बनावट ही कुछ अलग तरह की थी पुरे 5 हजार चौरस फूट में बने इन बंगलो में सभी सुविधा के रहने की वजह से अभी कुछ महिनों पहले तक इस निवासस्थान में उपविभागीय अधिकारी डाॅ.ललित व-हाडे अपने कार्यकाल के समय पुरे परीवार के साथ यहां पर रहते थे. जब से उनका यहां से तबादला हुआ तब से आज तक इन बंगलो तथा कर्मचारी निवास्थान की हालत इतनी खराब हो गई की आज की स्थिति में साधा बिजली का कनेक्शन भी यहां नही है. उसे भी बिल न भरने के कारण काट दिया गया है. निवासस्थान परीसर में गुलाब, मोगरा,शेवंती तथा अन्य जाती के फुल झाडं की बाग तहस नहस हो कर पुरी तरह से सुखं गई है. इस निवासस्थान के पिछले हिस्से में मंडल अधिकारी तथा पटवारी के निवास्थान में रात के समय कोई नही रहता है, पंचायत समिती के कुछ निवास स्थान की हालत भी बहुत खराब हो गई है. पंचायत समिती के निवासस्थान से हुतात्मा स्मारक की और जाने वाले रास्ते में रास्ता कम बडे बडे खड्डे नजर आते है. तथा इस रास्ते की गिट्टी निकलकर जगह जगह बडे बडे खड्डे पड गये है. आस पास के परीसर में बडी बडी झाडीयो के झुंड रास्ते के परीसर में दिखाई पडते है. स्ट्रीट लाईट की लाईन न रहने से रात के समय में यहां से गुजर ने वाले राहगिरो को डर लगता है.
    आज इन शासकीय अधिकारीयो के निवास्थान की और देखकर पुराने गित के बोल याद आते है की, “कोई लौटा दे मेरे बिते हुये दिन” कब सरकार तथा लोकप्रतिनिधी इस और ध्यान देकर सरकारी कर्मचारीयो को अपने मुख्यालय रहने की सक्ती करेंगे यह एक बडा प्रश्न चिन्ह ही है.
जाहिरात